माँ काली जी का मंत्र
ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं हूं हूं ह्रीं ह्रीं स्वाहा।
10 महाविद्याओं में से साधक महाकाली की साधना को सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली मानते हैं, जो किसी भी कार्य का तुरंत परिणाम देती हैं। साधना को सही तरीके से करने से साधकों को अष्टसिद्धि प्राप्त होती है। काली की पूजा या साधना के लिए किसी गुरु या जानकार व्यक्ति की मदद लेना जरूरी है।काली या महाकाली हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं. यह सुन्दरी रूप वाली भगवती पार्वती का काला और भयप्रद रूप है, जिसकी उत्पत्ति असुरों के संहार के लिए हुई थी. पार्वती के इस रूप मां काली को बंगाल, ओडिशा और असम में पूजा जाता है. काली को शाक्त परम्परा की दस महाविद्याओं में से एक भी माना जाता है
ममतामयी माता काली के क्रोध को शांत करने के लिए शिवजी को देवी काली के पैरों के नीचे आना पड़ा और देवी काली को दांतों से अपनी जिह्वा को दबाना पड़ा। इसके बाद मां काली दानवों को विनाश करने लगी उनका विकराल रूप देखकर सभी देवता परेशान हो गए। उनका क्रोध शांत करना किसी के बस की बात नहीं थी।


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