Wednesday, 7 December 2022

Ma Vaishno Devi | Call Now+919118281718


 नहीं जानते होंगे आप माँ वैष्णो का एक और नाम था मां वैष्णो देवी को बचपन में त्रिकुटा नाम से बुलाया जाता था | क्यों माँ वैष्णो जी के दर्शन करने के बाद भैरव जी का दर्शन करना जरुरी है | नहि किया तो माँ वैष्णो जी का दर्शन अधूरा माना जाता है ऐसी मान्यता है|

ॐ सर्वतीर्थ समूदभूतं पाद्यं गन्धादि-भिर्युतम्।
अनिष्ट-हर्ता गृहाणेदं भगवती भक्त-वत्सला।।
ॐ श्री वैष्णवी नमः।
मान्यता है कि माता वैष्णो देवी ने त्रेता युग में माता पार्वती, सरस्वती और लक्ष्मी के रूप में मानव जाति के कल्याण के लिए एक सुंदर राजकुमारी का अवतार लिया था। उन्होंने त्रिकुटा पर्वत पर तपस्या की थी। बाद में उनका शरीर तीन दिव्य ऊर्जाओं महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के सूक्ष्म रूप में विलीन हो गया।
जब भैरवनाथ ने अंदर जाने की कोशिश की तो हनुमान और भैरवनाथ के बीच युद्ध हुआ। इसके बाद भी जब भैरवनाथ ने हार न मानी तो मां स्वयं महाकाली के रूप में प्रकट हुई और भैरवनाथ का वध किया। जिस पर्वत पर भैरवनाथ का सिर गिरा वो स्थान भैरवनाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।


मां वैष्णो देवी को बचपन में त्रिकुटा नाम से बुलाया जाता था। बाद में भगवान विष्णु के वंश से जन्म लेने के कारण वे वैष्णवी कहलाईं। जब त्रिकुटा 9 साल की थीं, तब उन्होंने अपने पिता से समुद्र के किनारे पर तपस्या करने की अनुमति चाही। त्रिकुटा ने राम के रूप में भगवान विष्णु से प्रार्थना की

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