यहाँ होती है सभी मनोकामनाएं पूरी, बालाजी और हनुमान जी में क्या अंतर है? हनुमान जी के पुत्र मकरध्वज को ही बाला जी कहा जाता है, क्योंकि बाला जी का संबंध कुआं से यानी पाताल लोक से है।
सालासर बालाजी के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर की स्थापना मोहनदास महाराज ने विक्रम संवत 1811 में श्रावण शुक्ल नवमी को की थी। ऐसी मान्यता है कि मोहनदासजी भक्ति से प्रसन्न होकर हनुमानजी आसोटा में मूर्ति रूप में प्रकट हुए और अपने भक्त की मनोकामना पूर्ण की। तत्पश्चात मूर्ति की सालासर में प्राण प्रतिष्ठा हुई।
इस मंदिर में बालाजी के परम भक्त मोहनदास जी की समाधि स्थित है तथा मोहनदास जी द्वारा प्रज्जवलित अग्निकुंड धूनी भी मौजूद है। मान्यता है कि इस अग्नि कुंड की विभूति समस्त दूखों एवं कष्टों को दूर कर देती है। सालासर बालाजी मंदिर में हनुमान जयंती, राम नवमी के अवसर पर भंडारे और कीर्तन इत्यादि का विशेष इंतजाम होता है
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