जीवदानी का अर्थ है जीवन देने वाली माता होता है। जानकारों के मुताबिक इस सतपुरा पहाडिय़ों की शृंखला में पहले जीवन दायी औषधियां मिलती थी। इन औषधियों से लोगों की प्राण रक्षा होती थी, इसलिए एक मान्यता यह भी है कि इसी वजह से माता का नाम जीवदानी पड़ा गया। तब से लोग इन्हें जीवदानी माता कहने लगे।
श्रीजीवदानी चालीसा माँ जिवदानि ध्यान धरउँ, दीजै शुभ आशीष। बरनौं यश विनती करउँ, रहे चरन में शीश।। हे माँ जीवदानी!
जाहिरा तौर पर इसका अस्तित्व उस समय तक जाता है जब भगवान शिव अपनी पत्नी सती के शव को ले जा रहे थे और उनका शरीर टुकड़ों में बिखरा हुआ था जो दुनिया भर में 52 स्थानों पर गिरकर इसे 'शक्तिपीठ' बना रहा था। मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है जो समुद्र तल से लगभग 1500 फीट ऊपर है।
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