Saturday, 11 February 2023

Ma Kali Kavach | Call Now+9118281718

 


काली देवी के कवच को मूल संस्कृत में निम्न दिया जा रहा है और उसका हिन्दी में अर्थ भी दिया है । साधक को चाहिए कि पाठ करते समय मूल श्लोक संस्कृत का ही पाठ प्रयोग करें ।

कालीपूजा श्रुता नाथ भावाश्च विविध: प्रभो ।
इदानीं श्रोतुमिच्छामि कवचं पूर्वसूचितम् ।।
त्वमेव शरणं नाथ त्राहि मां दु:खसङ्कटात् ।
त्वमेव स्त्रष्टा पाता च संहर्ता च त्वमेव हि ।।
भैरवी ने कहा-हे नाथ ! हे प्राणवल्लभे, प्रभो ! मैने कालीपूजा और उसके विविध भाव सुने, अब पूर्व सूचित कवच सुनने की इच्छा हुई है, उसको वर्णन करके दुःख-संकट से मेरी रक्षा कीजिये । आप ही रचना कर रक्षा करते और संहार करते हो, हे नाथ ! आप ही मेरे आश्रय हो ।

भैरव उवाच
रहस्यं शृणु वक्ष्यामि भैरवि प्राणवल्लभे ।
श्रीजगन्मंगलं नाम कवचं मंत्रविग्रहम् ।
पठित्वा धारयित्वा च त्रैलोक्यं मोहयेत् क्षणात् ।।

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