कामाख्या तंत्र क्या है?
एक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने सती के शरीर को सुदर्शन से अंग भंग कर दिया था और सती के अंग जिस-जिस स्थान पर गिरे, वह शक्ति पीठ के नाम से जाने जाते हं। माता सती की योनि कामुरु नामक स्थान पर गिरी थी जिसे आज कामाख्या देवीं के नाम से जाना जाता है, यह स्थान देवी के 51 शक्ति पीठों में सबसे शक्तिशाली पीठ माना जाता है।
ॐ नमो कामाक्षी देवी आमुकी में वंशं कुरु कुरु स्वः॥ विष्णुब्रह्मशिवैर्देवैर्धृयते या जगन्मयी । सितप्रेतो महादेवो ब्रह्मा लोहितपंकजम् ॥
और इस बीजमंत्र का सात बार उच्चारण पूरे मन, वचन और श्रद्धापूर्वक करने के बाद आप लौंग को मुंह से निकालकर एक कागज पर प्रेमिका का नाम लिखकर लौंग को लड़की के नाम के ऊपर रख दें। और कागज को छत पर पानी की टंकी के पास रख दें। और फिर आप देखेंगे कि वह लड़की अथवा महिला आपसे प्रेम करने लगेगी।
पूजा विधि
माँ कामाख्या की पूजा करने से पहले पूजा स्थान या चौकी को साफ करके फूलों से सजा लें।
कन्याओं को अपने घर आमंत्रित करें।
कन्या पूजन करके उन्हें नए कपडे देकर भोजन करवाए।
आप माँ कामाख्या को प्रसन्न करने लिए भंडारे का आयोजन कर सकते है।
इसके बाद कामाख्या देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।


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