शिव जी को प्रसन्न करने के लिए सावन में रुद्राभिषेक सबसे उत्तम माना जाता है। रुद्राभिषेक एक पूजा और धार्मिक क्रिया है, जो भगवान शिव के भक्तों द्वारा की जाती है। इस प्रक्रिया में शिवलिंग पर जल, धूप, दीप और बिल्वपत्र की अर्पण किया जाता है और मंत्रों का जाप भी किया जाता है।
सावन में शिवलिंग का कुशाजल से अभिषेक करने से सभी प्रकार के रोग नष्ट होते हैं। सावन मास में शिवलिंग का गन्ने के रस से अभिषेक करने से लक्ष्मी और वैभव की प्राप्ति होती है। वाराणसी के ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सावन मास में भगवान शिव के अभिषेक का विशेष महत्व है। इसलिए हर दिन रुद्राभिषेक करना बहुत शुभ माना गया है
पंचांग के अनुसार, सावन की मासिक शिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाएगी. इसकी तिथि 15 जुलाई को रात 08 बजकर 32 मिनट पर शुरू हो जाएगी और समापन 16 जुलाई को रात 10 बजकर 08 मिनट पर होगा. शिवरात्रि का पूजन मुहूर्त 16 जुलाई को रात 12 बजकर 07 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा.
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