बाबा विश्वनाथ के 'महाप्रसाद' में चमत्कार होता है. बाबा न सिर्फ यहां आने वालों के सभी दुख हर लेते हैं बल्कि लोगों की किस्मत भी बदल देते हैं. पहले बाबा के मंदिर में चढ़ने वाला प्रसाद अलग अलग जगह से आता था.
काशी शिव को प्रिय क्यों है?
शिव की नगरी काशी के कण-कण में भगवान भोलेनाथ का वास है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार काशी भगवान शिव के त्रिशुल पर बसी हुई है। पूरे बनारस में आपको भगवान शिव के जितने मंदिर मिलेंगे, उतने मंदिर संभवतः पूरी दुनिया में नहीं मिलेंगे। कहा भी जाता है कि काशी भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।
आनन्दकन्दं हतपापवृन्दम्। श्रीविश्वनाथं शरणं प्रपद्ये॥ अर्थ - जो भगवान् शंकर आनन्दवन काशी क्षेत्र में आनन्दपूर्वक निवास करते हैं, जो परमानन्द के निधान एवं आदिकारण हैं, और जो पाप समूह का नाश करने वाले हैं, मैं ऐसे अनाथों के नाथ काशीपति श्री विश्वनाथ की शरण में जाता हूँ।
भगवान शिव को कौन सा भोजन पसंद है?
जानिए भगवान शिव को कौन सा प्रसाद ...
भगवान शिव को भांग और पंचामृत का नैवेद्य पसंद होता है। इसके अलावा उन्हें रेवड़ी, चिरौंजी और मिश्री भी चढ़ाई जाती है। सावन के महीने में भोले बाबा का व्रत रखकर उन्हें गुड़ चना और चिरौंजी का भोग लगाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
काशी में क्या दान करना चाहिए?
काशी में मां गंगा और बाबा विश्वनाथ साक्षात विराजमान हैं। पितरों की कामना से दान में गेंहू, चावल, अन्न, बर्तन फल का दान दिया जाता है। - पितरों के नाम से गाय को घास देना चाहिए।
काशी विश्वनाथ की क्या मान्यता है?
जानें काशी विश्वनाथ
मंदिर के प्रमुख देवता श्री विश्वनाथ हैं जिसका अर्थ है ब्रह्मांड के भगवान ऐसी मान्यता है कि अगर भक्त एक बार इस मंदिर के दर्शन और पवित्र गंगा में स्नान कर ले तो मोक्ष की प्राप्ति होती है. काशी विश्वनाथ मंदिर अनादि काल से शैव दर्शन का केंद्र रहा है
बाबा विश्वनाथ भक्तों के सभी कष्ट हरने वाले माने जाते हैं। कहा जाता है कि बाबा विश्वनाथ दर्शन मात्र से मनुष्य का जीवन सफल हो जाता है। यदि कोई भक्त बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाता है, तो उसे जन्म-जन्मांतर के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही बाबा का आशीर्वाद अपने भक्तों के लिए मोक्ष का द्वार खोल देता है।


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