Saturday, 2 September 2023

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 मैहर देवी मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

मैहर माता का मंदिर, आल्हा करते हैं
माना जाता है कि यहां मां सती का हार गिरा था इसीलिए इसकी गणना शक्तिपीठों में की जाती है। करीब 1,063 सीढ़ियां चढ़ने के बाद माता के दर्शन होते हैं। पूरे भारत में सतना का मैहर मंदिर माता शारदा का अकेला मंदिर है। कहते हैं कि दोनों भाइयों ने ही सबसे पहले जंगलों के बीच शारदादेवी के इस मंदिर की खोज की थी।


मैहर मंदिर की कहानी क्या है?
ब्रह्मांड की भलाई के लिए भगवान विष्णु ने सती के शरीर को 52 भागों में विभाजित कर दिया. जहां भी सती के अंग गिरे वहां शक्तिपीठों का निर्माण हुआ. ऐसा माना जाता है यहां पर माता सती का हार और कंठ गिरा था. इसलिए इस जगह को माई का हार यानि मैहर कहा जाता है.

मैहर का माता शारदा का मंदिर विंध्य पर्वत श्रेणी के त्रिकूट पर्वत की चोटी पर स्थित है। यहाँ माता सती के गले का हार गिरा था इस कारण इस स्थान का नाम मैहर (माई का हार) पड़ा।


मैहर शहर का नाम भी भगवान से जुड़ी कहानी पर ही निर्धारित है कहा जाता है। 
जब भगवान शिव जी देवी सती के शव को गोदी मे उठाकर ले जा रहे थे तब उनके गले का हार टूट कर इस जगह में गिर गया और तब से ही इस शहर का नाम माई का हार” “मेहर ” पड़ गया। शारदा देवी जी का मंदिर भक्तों से सदा पटा रहता है।

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