क्या होता है पितृदोष
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार मृत्यु लोक पर हमारे पूर्वजों की आत्माएं अपने परिवार के सदस्यों को देखती रहती हैं. जो लोग अपने पूर्वजों का अनादर करते हैं, या उन्हें कष्ट देते हैं. इससे दुखी दिवंगत आत्माएं उन्हें शाप देती हैं इसी शाप को पितृ दोष माना जाता है.
पितृ दोष के लक्षण क्या होते हैं?
घर में हमेशा किसी का बीमार रहना, मान-सम्मान की हानि, पिता से विवाद, बहुत मेहनत के बाद भी सफलता न मिलना या फिर बने बनाए काम का बिगड़ जाना. यह लक्षण कुंडली में सूर्य के कमजोर होने का संकेत हैं. यह चीजें इस तरफ भी इशारा करती हैं कि आपके कुंडली में पितृ दोष है. ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष को एक श्राप की तरह माना जाता है.
पितृ दोष कितने वर्ष तक रहता है?
पितृदोष का भयानक असर, जानिये
विद्वानों ने पितर दोष का संबंध बृहस्पति (गुरु) से बताया है। अगर गुरु ग्रह पर दो बुरे ग्रहों का असर हो तथा गुरु 4-8-12वें भाव में हो या नीच राशि में हो तथा अंशों द्वारा निर्धन हो तो यह दोष पूर्ण रूप से घटता है और यह पितर दोष पिछले पूर्वज (बाप दादा परदादा) से चला आता है, जो सात पीढ़ियों तक चलता रहता है।
अगर आपकी कुंडली में पितृदोष है, तो पितरों की फोटो दक्षिण दिशा की ओर लगाएं। इसके साथ ही रोजाना माला चढ़ाकर उनका स्मरण करना चाहिए। पीपल के पेड़ पर दोपहर के समय जल चढ़ाएं। इसके साथ ही फूल, अक्षत, दूध, गंगाजल और काले तिल भी चढ़ाने चाहिए और पितरों का स्मरण करना चाहिए।
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