कहते हैं मां के दर्शनों का सौभाग्य केवल उन्ही को मिलता है जिन्हे मां का बुलावा आता है। और जिन्हे मां का निमंत्रण मिले वो भाग्यशाली कहलाते है। मां वैष्णो देवी की महिमा ही ऐसी है। तभी तो पूरे साल मां का दरबार भक्तों से गुलज़ार रहता है।
मान्यता है कि माता वैष्णो देवी ने त्रेता युग में माता पार्वती, सरस्वती और लक्ष्मी के रूप में मानव जाति के कल्याण के लिए एक सुंदर राजकुमारी का अवतार लिया था। उन्होंने त्रिकुटा पर्वत पर तपस्या की थी। बाद में उनका शरीर तीन दिव्य ऊर्जाओं महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के सूक्ष्म रूप में विलीन हो गया।
यही मंत्र उन्हें प्रसन्न भी करते हैं। ॐ सर्वतीर्थ समूदभूतं पाद्यं गन्धादि-भिर्युतम्। अनिष्ट-हर्ता गृहाणेदं भगवती भक्त-वत्सला।। ॐ श्री वैष्णवी नमः।
देहा-लंकारण वस्त्रमतः शान्ति प्रयच्छ मे।। माल्या दीनि सुगन्धीनि माल्यादीनि वै देवी। मया-हृताणि-पुष्पाणि गृहायन्ता पूजनाय भो।। ॐ सहस्त्र शीर्षाः पुरुषः सहस्त्राक्षः सहस्त्र-पातस-भूमिग्वं सव्वेत-स्तपुत्वा यतिष्ठ दर्शागुलाम्।


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