यदि कुंडली में पितृ दोष बन रहा हो, तो जातक को अपने घर की दक्षिण दिशा की दीवार पर अपने स्वर्गीय परिजन का फोटो लगाकर उस पर हार चढ़ाना और रोज उनकी पूजा करके, उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए. इससे नाराज पितर प्रसन्न हो जाते है.
पूर्वजों के निमित्त श्राद्ग के बाद काले तिल, नमक, गेंहू, चावल, गाय का दान, सोना, वस्त्र, चांदी का दान भी पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है. किसी सार्वजनिक स्थल पर पीपल, का पौधा लगाएं और उसकी सेवा करें, रोजाना श्रीमद्भागवत गीता के सातवें अध्याय का पाठ करने से भी पितृ दोष खत्म होता है.
पितृ दोष से मुक्ति के लिए ये उपाय किए जा सकते हैं:
पितृ पक्ष में श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मणों को भोजन कराना, और दान करना चाहिए.
हर दिन सुबह स्नान-ध्यान के बाद दक्षिण दिशा में मुंह करके जल में काले तिल मिलाकर पितरों को जल अर्घ्य देना चाहिए.
पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए. पीपल के पेड़ में जल चढ़ाने के साथ ही, काले तिल, दूध, अक्षत, और पुष्प भी अर्पित करने चाहिए.
गरीबों को दान-पुण्य करना चाहिए. किसी गरीब कन्या की शादी में मदद करनी चाहिए.
रोज़ाना सुबह उठने के बाद दक्षिण दिशा में मुंह करके पितरों को प्रणाम करना चाहिए.
घर की दक्षिण दिशा में पूर्वजों की तस्वीरें लगाकर उनसे अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगनी चाहिए.
पितृपक्ष में हर दिन गाय को चारा और गौ ग्रास खिलाना चाहिए.
सोमवार की सुबह स्नान करके शिव मंदिर में जाकर, आक के 21 फूल, दही, बिल्वपत्र के साथ शिवजी की पूजा करनी चाहिए.
घी में डुबोकर कपूर जलाना चाहिए.
श्रीमद्भागवत गीता के सातवें अध्याय का पाठ करना चाहिए.
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