देवी बगलामुखी दसमहाविद्या में आठवीं महाविद्या हैं यह स्तम्भन की देवी हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड की शक्ति का समावेश हैं माता बगलामुखी शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद विवाद में विजय के लिए इनकी उपासना की जाती है। इनकी उपासना से शत्रुओं का नाश होता है तथा भक्त का जीवन हर प्रकार की बाधा से मुक्त हो जाता है। हर साल वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है |
माता बगलामुखी का बीज मंत्र है?
दस महाविद्याओं में अष्टम स्वरूप माता बगलामुखी का है। इनका ध्यान बगुला पक्षी की तरह एकाग्र है। इसलिए इन्हें बगलामुखी कहते हैं। विशेष रूप से मां का पूजन शत्रु पर विजय, राजनीतिक जीत, बच्चों की शिक्षा, मुकदमों में विजय के लिए किया जाता है।
मंत्र के जप रात्रि के 10 से प्रात: 4 बजे के बीच करें। - दीपक की बाती को हल्दी या पीले रंग में लपेट कर सुखा लें। - साधना में छत्तीस अक्षर वाला मंत्र श्रेष्ठ फलदायी होता है। - साधना अकेले में, मंदिर में, हिमालय पर या किसी सिद्ध पुरुष के साथ बैठकर की जानी चाहिए।
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