हनुमान जी एक ऐसे देवता है जो कलयुग में साक्षात् धरती पर रहने का वरदान मिला है करयुग में हर समस्या का समाधान संकट मोचन महाबली हनुमान जी की सच्ची भक्ति और भाव से पूजा करने पर आपके सभी समस्या का समाधान मिलेगा| आपके सभी कष्टों को दूर करते है महाबली हनुमान
हनुमान जी को बुलाने का मंत्र है?
– हनुमान बीज मंत्र: ॐ ऐं भ्रीम हनुमते, श्री राम दूताय नम:
बहुत कम लोग जानते हैं कि हनुमान जी के बचपन का नाम मारुति था, जो दरअसल उनका सबसे पहला व असली नाम था। * देवी अंजना के पुत्र होने से इन्हें अंजनी पुत्र व आंजनेय भी कहा जाता है। तो वही पिता केसरी के नाम से भी इन्हें जाना जाता हैं।
रामायण के अनुसार वे श्रीराम के अत्यधिक प्रिय हैं। इस धरा पर जिन सात मनीषियों को अमरत्व का वरदान प्राप्त है, उनमें बजरंगबली भी हैं। हनुमान जी का अवतार भगवान राम की सहायता के लिये हुआ। हनुमान जी के पराक्रम की असंख्य गाथाएँ प्रचलित हैं। इन्होंने जिस तरह से राम के साथ सुग्रीव की मैत्री कराई और फिर वानरों की मदद से असुरों का मर्दन किया, वह अत्यन्त प्रसिद्ध है।
उनका निवास स्थान भारत के तमिलनाडु जिले में रामेश्वरम के पास, गंधमादन पर्वत कहा जाता है। हमारे पास इस क्षेत्र में भगवान हनुमान को समर्पित एक मंदिर है। हालाँकि, यह हमेशा कहा जाता है कि हनुमान उन सभी स्थानों पर निवास करते हैं जहाँ राम की महिमा गाई जाती है।
वर्तमान युग में हनुमान जी की साधना को तुरंत फल देने वाली साधना कहा गया है। इसी कारण से हनुमान जी जन-जन के देवता कहलाते हैं। इनकी पूजा अर्चना बेहद सरल है और इनके मंदिर भी हर जगह बने हुए है। मानव जीवन का सबसे बड़ा दुःख भय है और हनुमान जी का जो भी नाम स्मरण करता है वो भय से सदैव मुक्त हो जाता है। हनुमान साधना के लिए कुछ नियम शास्त्रों में बताए गए हैं।
1 - हनुमान की जी सेवा में शुद्धता बेहद जरूरी है। प्रसाद शुद्ध घी का बना हुआ होना चाहिए।
2 - हनुमान जी को हमेशा तिल के तेल में ही मिले हुए सिंदूर का लेपन किया जाता है। कई जगह शुद्ध घी लेने का भी विधान है।
3 - हनुमान जी को केसर के साथ घिसा हुआ लाल चंदन भी लगाना चाहिए।
4 - पुष्पों में लाल और पीले बड़े फूल अर्पित करें। कमल का फूल और सूर्यमुखी का फूल अर्पित करने पर हनुमान जी प्रसन्न होते हैं।
5 - सुबह के पूजन में गुड़,नारियल का गोला और लड्डू अर्पित करे। दोपहर में गुड़,घी,चूरमा और रोट अर्पित करें। शाम की पूजा में आम,अमरुद और केला आदि फलों का प्रसाद चढ़ाएं।
6 - हनुमान जी की साधना में ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य है।
7 - जो भी प्रसाद हनुमान जी को अर्पित किया जाए उसे साधक को अवश्य ग्रहण करना चाहिए।
8 - मंत्र जप सदैव बोलकर करें,हनुमान जी के समक्ष उनके नेत्रों की और देखते हुए मंत्रों का जाप करें।
9 - साधना में 2 प्रकार की माला ली जाती है। सात्विक साधना के लिए रुद्राक्ष की माला और तामसी साधना के लिए मूंगे की माला का प्रयोग करें।
10 - मंगलवार को हनुमान की विशेष साधना का नियम है। अनुष्ठान इसी दिन करें। बाकी शनिवार को भी हनुमत पूजा का विधान है।
हनुमत साधना से ग्रह अनुकूल होते हैं। सूर्य और हनुमान जी एक दूसरे के स्वरूप है इसलिए हनुमत साधना करने वाले जातक में सूर्य तत्व आता है। उसके अंदर सूर्य जैसा तेज,आत्मविश्वास और ओज आ जाता है। यही तेज उस व्यक्ति को सामान्य व्यक्ति से अलग करते हैं। भगवान हनुमान जी कृपा पाने और उनको प्रसन्न करने के लिए रोजना हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए।
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