महाकाल का वास होने से पुरातन साहित्य में उज्जैन को महाकालपुरम भी कहा गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव एकमात्र ऐसे देवता हैं जो थोड़े जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी कर देते हैं। उसी प्रकार जो भी भक्त महाकालेश्वर के दर्शन कर अपनी मनोकामना करता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।
महाकाल का का महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् || इसको बेहद प्रभावशाली माना जाता है।
शिवलिंग पर चंदन और भांग अर्पित की जाती है, वहीं जलाधारी पर हल्दी अर्पित की जाती है. साथ ही माता पार्वती को मेहंदी लगाई जाती है. इसके बाद महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाहोत्सव मनाया जाता है. भगवान महाकाल दूल्हा बनते हैं.
वो धरती फाड़कर महाकाल के रूप में प्रकट हुए. शिव ने अपनी हुंकार से राक्षस को भस्म कर दिया. इसके बाद ब्राह्रणों ने महादेव से यहीं विराजमान होने के लिए प्रार्थना की. माना जाता है कि ब्राह्मणों के निवेदन पर शिव जी यहां महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में वास करने लगे.
धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव एकमात्र ऐसे देवता हैं जो थोड़े जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की हर इच्छा पूरी कर देते हैं। उसी प्रकार जो भी भक्त महाकालेश्वर के दर्शन कर अपनी मनोकामना करता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।


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